My Poetry

गरीबी

My Poetry
0
बच्चे का रोना रुला देता है जब कहता है, “माँ खिलौना दिला दे, मेरे पास एक भी नहीं है माँ।” माँ रोती है पर दिल हर सुनने वाले का दुखता है जब बच्चा कहता है, “माँ धूप बहुत है, घर पर छत डलवा दे माँ। सड़क पर पैर जलता है,…

सुबह जगी नहीं तो ?

My Poetry
0
एक डरावना ख्याल मन में रहता है, नींद आती है पर सोने में दिल घबराता है। कल की सुबह देखनी है पर सवाल आता है जगी नहीं तो ? क्या होगा आगे अगर मैं कल जगी ही नहीं तो ? सो जाना मेरे बस में है, आँखें बंद कर लेती…

मैं बादलों को छूने ..

My Poetry
0
मैं बादलों को छूने आगे बढ़ती हूँ, और चलते चलते कहीं भीड़ में मिल जाती हूँ। उस भीड़ से बैचैन होकर सपनों की तलाश में,उस रास्ते को छोड़ कर कहीं और चली जाती हूँ। कुछ गुमनाम सा सूनसान साकहीं मोड़ आता है,किसी के साथ के इन्तजार में वहीं रुक जाती…

आखिरी दिन

My Poetry
1 Comment
बहुत वक्त है तू कहता है तुझे तेरा आखिरी दिन दिखाई नहीं देता पर मुझे देता है मुझे तेरी आखिरी साँस सुनाई देती है आखिरी बार पलक झपकती दिखाई देती है और तू कहता है कि वक्त बहुत है तुझे अभी मजाक लगता है मौत का सुनके पर मैं तो…
Menu